कुण्डलपुर (मध्य प्रदेश)। सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुण्डलपुर में वीर शासन जयंती श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्ववंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य तथा आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 समतासागर जी महाराज ने विद्या भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए भगवान महावीर के आत्मशासन और आत्मविजय के सिद्धांतों का प्रेरक संदेश दिया।

आत्मविजय ही महावीर बनने का मार्ग

मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने कहा कि संसार को जीतने वाला वीर तो हो सकता है, लेकिन महावीर वही बनता है जो अपने मन, विकारों, कषायों और कर्मों पर विजय प्राप्त कर ले। जिसने स्वयं को जीत लिया, वही जितेन्द्रिय, जिन और जिनेन्द्र कहलाने योग्य बनता है। भगवान महावीर का शासन आत्मशासन, आत्मअनुशासन और सर्वोदय का शासन है, जो संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

धर्म का शासन संघर्ष नहीं, आत्मपरिवर्तन का मार्ग

मुनिश्री ने कहा कि इतिहास में अनेक शासकों ने सत्ता और वर्ग विशेष के लिए शासन किया, जिससे रक्तपात और संघर्ष उत्पन्न हुए। किंतु तीर्थंकरों का शासन धर्म, करुणा और आत्मकल्याण का शासन है। यह बाहरी संघर्ष नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के विकारों से संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।

गुरुओं ने आचरण से दिया अनुशासन

उन्होंने कहा कि सच्चे गुरु दूसरों पर अनुशासन थोपते नहीं, बल्कि अपने आदर्श जीवन और संयमपूर्ण चर्या से समाज को अनुशासित करते हैं। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि मौन, विनय और आदर्श आचरण ही सबसे प्रभावी शिक्षा है।

जिनवाणी के संरक्षण का आह्वान

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री पवित्रसागर जी महाराज ने कहा कि जिनवाणी हमारी अमूल्य धरोहर है। भगवान महावीर की दिव्य वाणी गौतम गणधर आदि आचार्यों के माध्यम से आज तक सुरक्षित पहुंची है। पंचम काल के अंत तक इसके संरक्षण और संवर्धन का दायित्व प्रत्येक श्रद्धालु का है।

पूजन एवं धार्मिक आयोजन

प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज एवं अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती सुलेखा जैन (विदिशा) द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात क्षेत्र समिति के पदाधिकारियों एवं श्रेष्ठीजनों ने चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया। वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर की श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चना भी सम्पन्न हुई।