इंदौर। मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज वर्षायोग चातुर्मास के लिए वीर शासन जयंती के मंगल पावन अवसर पर मंगल कलश स्थापना की गई। दलाल बाग छत्रपति नगर में हुए इस भव्यातिभव्य कार्यक्रम में 17 हजार से अधिक श्रावक-श्राविकाएं इस ऐतिहासिक क्षण के गौरवशाली साक्षी बने। सुबह ठीक 8 बजे आरंभ हुए मंगल कलश स्थापना महोत्सव में अपनी मंगल देशना देते हुए मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि मंगलाचरण का पुण्य अक्षय होता है। जिसने यह मंगलाचरण किया है। वह बड़ा पुण्य भागी है। उन्होंने कहा कि मंगलाचरण लघु रूप में एक श्लोक या दो या पांच श्लोक में किया जाता है। इसकी शक्ति इतनी है कि यह शास्त्रों की रचना करने की सामर्थ्य प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आप घर बनाते हो और उसका नागल नहीं करते, मंगल कलश स्थापित नहीं करते तो वह घर कभी अक्षय निधि देने वाला नहीं हो सकता। इसलिए मंगल कलश और मंगलाचरण का विधान शास्त्रों में बताया गया है। मुनि श्री ने पुण्य कर्मों के बारे में प्रेरक कथा सुनाते हुए कहा कि एक व्यक्ति बहुत धनवान था। उसने कभी दान नहीं किया। कभी मंदिर नहीं गया। कभी मंगल कलश स्थापित नहीं किया। उसका पुण्य क्षय हुआ और वह त्रियंच में जन्म लेकर बकरा बना। एक दिन वह उसी घर में उसकी दुकान में आया और चार दाने खा लिए। उसके पुत्र ने उसे डंडे से पीटा तो बकरे की कमर टूट गई। उसी समय वहां से एक सिद्ध मुनिराज गुजरे तो उन्होंने उस बेटे से कहा कि जिसे तूने मार कर कमर तोड़ी वह कोई और नहीं तेरे ही पिता है, जो दान नहीं करने के कारण इस अवस्था में पहुँचे। मुनिराज की यह बात सुनकर उस बेटे का वैराग्य जाग गया और वह केश लोच करके मुनि दीक्षा लेकर संयम के मार्ग पर बढ़ गया। मुनि श्री ने इस बोधकथा से मंगलाचरण और मंगल कलश का महत्व बताया। दान का पुण्य बताया। उन्होंने कहा कि आप ऐसा इतिहास रचो कि पूरा विश्व कहे कि इंदौर ने कीर्तिमान बनाया है। पूरे विश्व की निगाह, कैमरे सब इंदौर की ओर हैं। देशभर के सभी साधु-संतों की निगाह भी आप पर हैं। इसलिए इस चातुर्मास को आपको भव्य और ऐतिहासिक बनाना है।

इन्होंने मंगल कलश की लगाई बोली
मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के वर्षायोग चातुर्मास के अंतर्गत इन्दौर में आयोजित मंगल कलश की बोली संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर प्रथम दो कलश चक्रवर्ती परिवारों के नाम रहे। 1616 कलश की बोली सपना मनीष गोधा, सुमित धाम, स्टेट एवं आनंद नवीन गोधा परिवार ने लगाई। श्रावक संस्कार श्रेष्ठी के रूप में 555 कलश की बोली आकाश दीपिका कोयला परिवार ने प्राप्त की। तृतीय कलश 355 कलश अशोक रानी डोसी के नाम रहा, जबकि चतुर्थ कलश 333 कलश आशारानी महेंद्र पांड्या ने प्राप्त किया। पंचम कलश 211 कलश धर्मेन्द्र संध्या जैन सिनकेम के नाम रहा। षष्ठम कलश 251 कलश हर्ष जैन को प्राप्त हुआ। सप्तम कलश 333 कलश सौरभ सलील बडजात्या के नाम रहा। अष्टम कलश 111 कलश राहुल जैन स्पोर्ट्स, नवम कलश 111 कलश अक्षय कासलीवाल तथा दशम कलश 111 कलश संजय जैन ललितपुर ने पुण्यार्जन किया। सकल दिगंबर जैन समाज चातुर्मास समिति की ओर से सभी पुण्यार्जक परिवार का सम्मान किया।
मुनि श्री के मुखारविंद से हुई मंगल कलशों की स्थापना
महोत्सव में मंगल कलश स्थापना मुनि श्री सुधासागर जी के मुखारविंद से मंत्रोंचार से की गई। सभी पुण्यार्जक परिवार कलश लेकर मंदिर जी में पहुंचे। जहां कलशों को स्थापित किया गया। इस अवसर पर ब्रह्मचारी प्रदीप भैया ने कलशों की बोली लगाई और संचालन किया। संगीत साधक प्रखर जैन के भजनों पर श्रावक-श्राविकाएं भक्ति में झूम उठीं। प्रखर ने गुरु वंदना सहित एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए। पूरे समारोह का संचालन अनुराग जैन और सपना मनीष गोधा ने किया।
इन्होंने किया दीप प्रज्वलन
भामाशाह भरत कुसुम मोदी, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद अंकिता गोधा, कार्यकारी अध्यक्ष नवीन गोधा, सपना मनीष गोधा, सुशीला पाटनी, अशोक रानी डोसी, अमित कासलीवाल, इंदर सेठी, पिंकेश टोंग्या, राहुल जैन स्पोर्ट्स वर्ल्ड आदि ने किया।
महोत्सव में यह रहे मौजूद
इस अवसर पर भामाशाह भरत कुसुम मोदी, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद अंकिता गोधा, कार्यकारी अध्यक्ष नवीन गोधा, सपना मनीष गोधा, सुशीला पाटनी, अशोक रानी डोसी, अमित कासलीवाल, इंदर सेठी, पिंकेश टोंग्या, राहुल जैन स्पोर्ट्स वर्ल्ड, प्रितपाल टोंग्या, सुरेंद्र बाकलीवाल, डीके जैन, नकुल पाटोदी, हर्ष कीर्ति जैन, आकाश कोयला, अनुज, पार्षद राजीव जैन, प्रितेश जैन, एसके चित्रा जैन, धर्मेंद्र सिमकेम, प्रदीप बड़जात्या, सुभद्रा जैन, आलोक मधु कोयला, महेंद्र आशा पांड्या, अक्षत कासलीवाल, सौरभ बड़जात्या, भागचंद कासलीवाल, लीना कासलीवाल, आकाश दीपिका, सौरभ गिन्नी परिवार, गढ़िया परिवार, पूनम पहड़िया, डॉ. जैनेंद्र जैन, राजेश जैन दद्दू, साधना दगड़े सहित बड़ी संख्या में जैन समुदाय उपस्थित रहा।



