श्रीफल जैन न्यूज की ओर से जैन संतों और साध्वियों की परिचय की श्रृंखला शुरू की जा रही है। जैन धर्म में मुनि बनना एक बहुत साहसिक और वैराग्य पूर्ण कार्य है। हर कोई व्यक्ति मुनि नहीं बन सकता। जैन दर्शन में मुनियों के आचार- विचार और दिनचर्या पर बहुत ही स्पष्ट और सख्त नियम बनाए हैं। श्रीफल जैन न्यूज का उद्देश्य है कि इस श्रृंखला के जरिए पाठक जान सकें कि जैन धर्म जीवन जीने की कला है। यह अध्यात्म और विज्ञान पर आधारित जीवन मार्ग है और इनके बारे में पढ़कर लोग धर्म की राह पर चल सकें। इसी श्रृंखला की चौथी कड़ी में आज प्रस्तुत है वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार के राजेश पंचोलिया की कलम से आचार्य श्री धर्म सागर महाराज के बारे में...
जीवन परिचय

नाम - श्री चिरंजी लाल जी, श्री कजोड़ी मल जी

जन्म दिनांक - पौष शुक्ला पूर्णिमा संवत 1970, 12 जनवरी वर्ष 1914 श्री धर्म नाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक पर

जन्म स्थान - गंभीरा, राजस्थान

पिता: श्री बख्तावर मल जी

माता: श्रीमती उमराव देवी जी

व्रत - नियम, आचार्यकल्प श्री 108 चंद्र सागर जी महाराज से , 15 वर्ष की अल्प आयु में

शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम

दो प्रतिमा का नियम

आचार्य कल्प श्री 108 वीर सागर जी महाराज से, इंदौर (म.प्र.) में

सात प्रतिमा का नियम

आचार्य कल्प श्री 108 चंद्र सागर जी महाराज से बड़नगर (म.प्र.) में

क्षुल्लक दीक्षा

चैत्र कृष्णा 7, संवत 2000

दीक्षा गुरु - आचार्य श्री 108 चंद्र सागर जी महाराज, बालूज, महाराष्ट्र

नाम - क्षुल्लक श्री 105 भद्र सागर जी महाराज

ऐलक दीक्षा -वैशाख माह संवत 2007

दीक्षा गुरु - आचार्य श्री 108 वीर सागर जी महाराज, फुलेरा, राजस्थान

मुनि दीक्षा - कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी संवत 2008

दीक्षा गुरु - आचार्य श्री 108 वीर सागर जी महाराज

नाम - मुनि श्री 108 धर्म सागर जी महाराज, फुलेरा, राजस्थान

आचार्य पद

फाल्गुन शुक्ल अष्टमी, 24 फरवरी, 1969

तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री 108 धर्म सागर जी महाराज, श्री महावीर जी, राजस्थान

कर कमलों से प्रदत्त दीक्षाएं - 76  

मुनि दीक्षा - 32

आर्यिका दीक्षा - 21

ऐलक दीक्षा - 1

क्षुल्लक दीक्षा - 17

क्षुल्लिका दीक्षा - 5

साधु जीवन- 43 वर्ष

चातुर्मास - 43

समाधि - वैशाख कृष्णा 9 नवमी विक्रम संवत 2044, सन् 1987, श्री मुनि सुब्रत नाथ भगवान का केवलज्ञान कल्याणक, सीकर, राजस्थान