अमित एडवोकेट चंदेरी की कलम में बहुत धार है रीवा की हृदय विदारक घटना पर उनकी मार्मिक कविता समाज का दर्द बयां कर रही है।चंदेरी(अशोकनगर)से पढ़िए, विशेष प्रस्तुति...
चंदेरी(अशोकनगर)। अमित एडवोकेट चंदेरी की कलम में बहुत धार है रीवा की हृदय विदारक घटना पर उनकी मार्मिक कविता समाज का दर्द बयां कर रही है। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि अमित कुमार जैन ने कविता के माध्यम से साधु सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस घटना पर, मौन खड़े क्यों सत्ताधारी" शीर्षक से कवि का शासन से सीधा प्रश्न है। रीवा में आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी एवं श्री उपशममति माताजी के साथ घटी हृदय विदारक दुर्घटना पर चंदेरी के युवा अधिवक्ता एड. अमित कुमार जैन ने अपनी स्वरचित कविता "माताजी को टक्कर मारी" के माध्यम से समाज का आक्रोश एवं पीड़ा व्यक्त की है।कविता में घटना का मार्मिक चित्रण

कवि ने लिखा है - घटना का चलचित्र देखकर, साफ नजर ये आता है कि ! हमला है ये उसी तरह का, ज्यों शिकार पर करे शिकारी। कविता में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि घात लगाकर ज्यों शिकार पर, झपटे वन में कोई शिकारी। उसी तरह इस आतंकी ने, माताजी को टक्कर मारी।

शासन-प्रशासन से तीखे सवाल

अमित जैन ने कविता के माध्यम से शासन और प्रशासन की चुप्पी पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया है। पत्रकार भी चुप हैं सारे, चुप हैं सारे ही अधिकारी। हृदय विदारक इस घटना पर, मौन खड़े क्यों सत्ताधारी। हमें समझ ये नहीं आ रहा, क्यों सरकार बनी गांधारी।

साधु-संतों के त्याग को किया नमन

कवि ने जैन साध्वी एवं संतों के त्यागमय जीवन को नमन करते हुए लिखा जैन साध्वी और सन्तों की, कोई न समझे लाचारी। पग विहार करते हैं हर-दम, छोड़के सारे सुख संसारी। सारी दुनिया में फिरते हैं, बनकर इस जग के हितकारी। साथ ही दुःख व्यक्त किया कि फिर भी इन पर युगों-युगों से, सितम ढा रहे अत्याचारी।

सोशल मीडिया पर वायरल

यह कविता सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और साधु सुरक्षा की मांग कर रहे हजारों श्रद्धालु इसे साझा कर रहे हैं। 25 मई को इंदौर में हुई मौन रैली के संदर्भ में यह कविता और भी प्रासंगिक हो गई है।

कविता का मूल पाठ

माताजी को टक्कर मारी

कैसे हम नादान कहें, और कैसे इसको कहें अनाडी।

इस उन्मादी-नीच-नराधम, को हम सब क्यों न दें गारी।

घटना का चलचित्र देखकर, साफ नजर ये आता है कि

हमला है ये उसी तरह का, ज्यों शिकार पर करे शिकारी।

कहां चल रहा था ये देखो, कहां पहुंच गई इसकी गाडी।

लगता है इस घटनाक्रम की, पहले से ही थी तैयारी।

घात लगाकर ज्यों शिकार पर, झपटे वन में कोई शिकारी।

उसी तरह इस आतंकी ने, माताजी को टक्कर मारी।

जैन साध्वी और सन्तों की, कोई न समझे लाचारी।

पग विहार करते हैं हर-दम, छोड़के सारे सुख संसारी।

सारी दुनिया में फिरते हैं, बनकर इस जग के हितकारी।

फिर भी इन पर युगों-युगों से, सितम ढा रहे अत्याचारी।

किस मद में ये चूर हुए हैं, कैसी इन पर चढी खुमारी।

पत्रकार भी चुप हैं सारे, चुप हैं सारे ही अधिकारी।

हृदय विदारक इस घटना पर, मौन खडे क्यों सत्ताधारी।

हमें समझ ये नहीं आ रहा, क्यों सरकार बनी गांधारी