इंदौर। धर्मनगरी इंदौर में जगतपूज्य मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज के वर्षायोग चातुर्मास के शुभ अवसर पर आयोजित मंगल कलश बोली श्रद्धा, समर्पण और गुरुभक्ति के अभूतपूर्व वातावरण में संपन्न हुई। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन में समाज के दानवीरों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता कर धर्मप्रभावना का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।
चक्रवर्ती परिवार बनने का ऐतिहासिक सौभाग्य
कार्यक्रम का सबसे गौरवपूर्ण क्षण तब आया जब श्रीमती सपना–श्री मनीष गोधा (सुमित धाम स्टेट) तथा श्री आनंद–श्री नवीन गोधा ने 1616-1616 मंगल कलश लेकर चक्रवर्ती परिवार बनने का ऐतिहासिक सौभाग्य प्राप्त किया। उनकी धर्मनिष्ठा का समाज ने जयघोष और करतल ध्वनि के साथ स्वागत किया।
इन परिवारों को मिला प्रमुख कलशों का सौभाग्य
इसके बाद 555 मंगल कलश के साथ श्री आकाश–श्रीमती दीपिका कोल को द्वितीय कलश प्राप्त हुआ।
355 मंगल कलश के साथ श्री अशोक–श्रीमती रानी डोसी ने तृतीय कलश लिया।
333 मंगल कलश के साथ श्रीमती आशा–श्री महेंद्र पाण्ड्या को चतुर्थ कलश का सौभाग्य मिला।
211 मंगल कलश के साथ श्री धर्मेंद्र–श्रीमती संध्या जैन (सिनकेम) ने पंचम कलश ग्रहण किया।
251 मंगल कलश के साथ श्री हर्ष जैन ने षष्ठम कलश प्राप्त किया।
333 मंगल कलश के साथ श्री सौरभ–श्री ललित बड़जात्या को सप्तम कलश का सौभाग्य मिला।
श्रद्धा और समर्पण का अनुपम दृश्य
अष्टम, नवम एवं दशम कलश का सौभाग्य 111-111 मंगल कलश के साथ क्रमशः श्री राहुल जैन स्पोर्ट्स, श्री अक्षय काशलीवाल तथा श्री संजय जैन (ललितपुर) को प्राप्त हुआ। पूरे आयोजन के दौरान "जय गुरुदेव" के जयघोषों से वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालुओं में अद्भुत उत्साह देखने को मिला।
धर्मप्रभावना का नया अध्याय
समाजजनों ने इसे इंदौर के धार्मिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न होने वाला यह वर्षायोग चातुर्मास धर्मप्रभावना, संस्कार जागरण और आध्यात्मिक उन्नयन का नया आयाम स्थापित करेगा।
दानवीरों का हुआ अभिनंदन
कार्यक्रम के समापन पर सभी दानदाताओं का अभिनंदन किया गया। समाज ने उनके धर्मसमर्पण, गुरुभक्ति और दानशीलता की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए उनके मंगलमय जीवन की कामना की।



