मुरैना। वीर शासन जयंती के पावन अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री 108 उदारसागर जी महाराज ने कहा कि वीर शासन जयंती जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पर्व है। इसी दिन भगवान महावीर स्वामी की प्रथम दिव्य देशना प्रवाहित हुई और उनके धर्मशासन का शुभारंभ हुआ, जिसने सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान एवं सम्यक चरित्र का मार्ग विश्व को प्रदान किया।
भगवान महावीर का शासन मानवता का सार्वभौमिक संदेश
आचार्यश्री ने कहा कि भगवान महावीर का शासन किसी एक समाज या देश तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश है। "जियो और जीने दो" का सिद्धांत आज विश्व शांति, सह-अस्तित्व, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का आधार बन सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती हिंसा, तनाव, स्वार्थ और भौतिकता के बीच भगवान महावीर के अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकांत, क्षमा और करुणा के सिद्धांत पहले से अधिक प्रासंगिक हैं।
धर्म जीवन के आचरण में दिखाई देना चाहिए
आचार्य उदारसागर जी महाराज ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ या मंदिर तक सीमित नहीं है। वास्तविक धर्म व्यक्ति के विचार, व्यवहार और चरित्र में दिखाई देता है। जो व्यक्ति क्रोध, लोभ और मोह पर विजय प्राप्त कर सभी जीवों के प्रति करुणा और दया का भाव रखता है, वही भगवान महावीर के शासन का सच्चा अनुयायी है।
आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन का संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री उपशांत सागर महाराज ने कहा कि वीर शासन जयंती केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन का पर्व है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सत्य, ईमानदारी, संतोष, क्षमा और मैत्री को जीवन में अपनाने तथा किसी भी जीव को कष्ट न पहुँचाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
गुरु भक्ति एवं सांस्कृतिक आयोजन
संध्याकालीन गुरु भक्ति कार्यक्रम में आचार्यश्री उदारसागर जी महाराज, मुनिश्री उपशांतसागर महाराज, ऐलकश्री उत्साहसागर जी, क्षुल्लकश्री उपकारसागर जी एवं क्षुल्लिका माताजी की गरिमामयी उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने भक्तिमय भजनों एवं नृत्यों के माध्यम से गुरु भक्ति व्यक्त की। प्रश्न मंच के अंतर्गत बच्चों को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए गए, जिससे उनमें विशेष उत्साह देखने को मिला।
समिति की सहभागिता
मंदिर समिति के ऑडिटर डॉ. मनोज जैन ने बताया कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन, महिलाएँ, युवा एवं बच्चों ने भाग लेकर भगवान महावीर के संदेश को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।



