देहरा तिजारा (अलवर)। श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र में परम पूज्य भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ससंघ (31 पिच्छी) के 31वें पावन चातुर्मास के दौरान वीर शासन जयंती श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाई गई। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर भगवान महावीर के जयघोष, मंगलगीतों एवं धार्मिक वातावरण से गुंजायमान रहा।

पाद प्रक्षालन एवं पूजन से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन से हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक शास्त्र भेंट अर्पित किए तथा विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चना संपन्न की। मंगलाचरण एवं जयघोष के बीच पूरा आयोजन भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ।

वीर शासन जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है

मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन एवं प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने कहा कि वीर शासन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है। भगवान महावीर का शासन प्रत्येक जीव को दुःखों से मुक्त कर आत्मशांति, समता और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करता है।

उन्होंने कहा कि वीर शासन प्रेम, अहिंसा, दया और करुणा का शासन है, जो "जियो और जीने दो" के सार्वभौमिक सिद्धांत पर आधारित है। धर्म केवल मंदिरों तक सीमित न रहकर व्यक्ति के विचार, व्यवहार और आचरण में भी दिखाई देना चाहिए।

श्रद्धालुओं ने लिया धर्म पालन का संकल्प

प्रवचन के उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों पर चलने, अहिंसा, संयम, क्षमा, सदाचार एवं मैत्रीभाव को जीवन में अपनाने तथा वीर शासन की मर्यादाओं का पालन करने का सामूहिक संकल्प लिया।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित

कार्यक्रम में मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिम्भू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन (पटेल), रवि जैन, पिंटा जैन, राजेश जैन, पारस जैन, सुरेंद्र जैन, मनोज जैन (कल्लू), संयम जैन सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक, महिला मंडल, युवा मंडल एवं दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

महावीर के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान

समापन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के "जियो और जीने दो" के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने तथा अहिंसा, करुणा और आत्मकल्याण के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प दोहराया।