देहरा तिजारा (अलवर)। श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र की पावन धरा पर परम पूज्य श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में चातुर्मास कलश स्थापना समारोह श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने समारोह में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
विधि-विधान से हुई कलश स्थापना
जैन परंपरा के अनुरूप मंगलाचरण, पूजन, जयघोष एवं धर्मसभा के बीच विधि-विधानपूर्वक चातुर्मास कलश की स्थापना की गई। पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण रहा तथा श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक धर्मकार्य में भाग लिया।
चातुर्मास आत्मशुद्धि का स्वर्णिम अवसर
मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन एवं प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, संयम, तप एवं साधना का सर्वोत्तम अवसर है। उन्होंने सभी श्रावक-श्राविकाओं से चार माह के दौरान कम से कम एक धार्मिक नियम, त्याग या व्रत का संकल्प लेकर उसका पालन करने का आह्वान किया।
अतिशय क्षेत्र की महिमा का किया वर्णन
आचार्यश्री ने कहा कि श्री 1008 चंद्रप्रभु भगवान का अतिशय क्षेत्र देहरा तिजारा श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक अनुभूतियों का प्रमुख केंद्र है। यहां सच्चे भाव से आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु आत्मिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भगवान की कृपा का अनुभव करता है।
भक्ति से गुंजायमान रहा परिसर
पूरे समारोह के दौरान भगवान श्री 1008 चंद्रप्रभु के जयघोषों से क्षेत्र गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के प्रवचनों का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा संयम, स्वाध्याय, तप, सेवा एवं सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
सामूहिक सहयोग से सफल हुआ आयोजन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अभिषेक जैन, केशव जैन एवं निर्मल जैन ने किया। आयोजन को सफल बनाने में प्रबंध कार्यकारिणी अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री मास्टर नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिंभू दयाल जैन, चातुर्मास समिति अध्यक्ष सुरेश जैन (पटेल), प्रचार मंत्री उमंग जैन, अमन जैन, शैलू जैन, सोनू जैन, वरुण जैन सहित समस्त कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं का उल्लेखनीय सहयोग रहा।
धर्म और संयम का संदेश
चातुर्मास कलश स्थापना समारोह ने श्रद्धालुओं के हृदय में भगवान श्री 1008 चंद्रप्रभु, गुरु एवं धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा का संचार किया। देहरा तिजारा की पावन धरा पर भक्ति, आस्था और संयम का यह दिव्य संगम लंबे समय तक श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।



