📜 ग्रन्थमाला

ग्रन्थमाला

जैन आगम ग्रंथों एवं शास्त्रों का परिचय

ग्रंथ माला 7 जीवन की आवश्यकताएं बनती हैं दुःखों का कारण

जीवन की आवश्यकताएं कर्म का कारण हैं। इन आवश्यकताओं के कारण ही अच्छे और बुरे कर्मों का बंधन होता है। रोटी, कपड़ा और मकान की चिंता ही हमें अच्छे और बुरे कर्मों की ओर प्रवृत करती हैं। इन्हीं के कारण राग-द्वेष, क्रोध, लालच आदि अवगुणों का जन्म होता है। इन आवश्यकताओं की पूर्ति में ही को

इंदौर Shreephal Jain News 23/2/2023, 6:00:01 am

ग्रंथमाला 6 : जो प्रशंसा के साथ गलतियां भी बताए, वही सच्चा

यह तुमने अच्छा किया। यह तुमने गलत किया। तुम्हें अपनी गलती को स्वीकार करना चाहिए। यह बात बताने वाला ही सच्चा मित्र होता है, क्योंकि वह तुम्हें जीवन की सच्चाई से अवगत करा रहा है। अच्छे कार्यों के लिए उत्साहवर्द्धन के साथ-साथ जो आपकी कमियों और अवगुणों की ओर भी आपका ध्यान आकर्षित करे

इंदौर Shreephal Jain News 16/2/2023, 5:58:03 am

ग्रंथ माला -5: सम्यक दर्शन के लिए धर्म के मूल रूप को पहचानना जरूरी

काल का प्रभाव कहें या सृष्टि में पाप कर्मों की बढ़ती मात्रा। संसार में चारों ओर अधर्म एवं अनुशासनहीनता बढ़ रही है। धर्म के मूल रूप त्याग, साधना, तप के स्थान पर पाखण्ड और बनावटी धार्मिक क्रियाओं को महत्व मिल रहा है। संसार की चकाचौंध में फंसे हुए तत्व धर्म के वास्तिक स्वरूप से परिचित

इंदौर Shreephal Jain News 9/2/2023, 6:00:30 am

ग्रंथ माला -4 : सम्यक चर्या का पालन करने वाला ही मोक्ष मार्ग का सच्चा राही

आधुनिक सुख-सुविधाओं और विकास की अंधी दौड़ में आज व्यक्ति के दैनिक जीवन और वातावरण में बड़ा बदलाव आ गया है। मनुष्य आध्यात्मिक और धार्मिक क्रियाओं से दूर होता जा रहा है। वह धर्म से अधिक महत्व भौतिक वस्तुओं, परिवार, समाज, मित्रता, वैभव, विलासिता, खर्चीले आयोजनों और बनावटीपन आदि को दे

इंदौर Shreephal Jain News 19/1/2023, 5:00:04 am

ग्रंथ माला- 3 : धर्म दिखाता है दुःख में भी सुख की राह

http://www.Shreephaljainnews.com पर आप पढ़िए प्रत्येक गुरुवार सुख और दुःख जीवन का हिस्सा हैं। न तो सुख स्थाई है और ना दुःख स्थाई है, लेकिन प्रतिकूल स्थितियों में भी आनंद खोजना, दुःख को सुख में परिवर्तित करना या दुःख में सुख का अनुभव करना, दुःख के कारणों से बचना और जीवन में प्रविष

इंदौर Shreephal Jain News 12/1/2023, 5:00:40 am

ग्रंथमाला- 2 : मंगलाचरण रत्नकरण्ड श्रावकाचार,यह जानना जरूरी है... क्यों है मंगलाचरण करने की परम्परा?

श्रीफल जैन न्यूज की प्रस्तुति प्रत्येक गुरुवार Shreephaljainnews पर आप पढ़िए किसी भी शुभकार्य को करने के पहले मंगलाचरण करने की धार्मिक परम्परा रही है। इसके पीछे कई कारण हैं-जैसे कार्य की समाप्ति निर्विघ्न हो, नास्तिकता का परिहार हो, शिष्टाचार का पालन हो, उपकार के स्मरण के लिए, पु

इंदौर Shreephal Jain News 5/1/2023, 5:00:37 am

ग्रंथमाला-1 : आओ जानें रत्नकरण्ड श्रावकाचार और आचार्य श्री समन्तभद्र स्वामी के बारे में

ग्रंथ माला प्रत्येक गुरुवार shreephaljainnews पर आप पढ़िए रत्नकरण्ड श्रावकाचार एक प्रमुख जैन ग्रन्थ हैं । जिसके रचयिता आचार्य श्री समन्तभद्र हैं । इस ग्रंथ में जैन श्रावक की चर्या का विस्तार से वर्णन है। आचार्य श्री समन्तभद्र ने जैन श्रावक कैसा होना चाहिए, इसके बारे में विस्तार स

इंदौर Shreephal Jain News 29/12/2022, 5:00:03 am