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समसामयिक एवं धार्मिक विषयों पर विशेष आलेख

मुनिश्री के 14वे दीक्षा दिवस 14 अक्टूबर पर विशेष : आध्यात्मिक संत श्रमण श्री सुप्रभसागर जी मुनि  एक विलक्षण संत

मुनिश्री के 14वे दीक्षा दिवस 14 अक्टूबर पर विशेष : आध्यात्मिक संत श्रमण श्री सुप्रभसागर जी मुनि एक विलक्षण संत आलेख - डॉ. सुनील जैन संचय, ललितपुर श्रमण परम्परा अत्यन्त प्राचीन, उन्नत और गरिमामय है।श्रमण-संस्कृति की गरिमा और महिमा युगों-युगों से बड़ी प्रभावक एवं लोकप्रिय रही है। श

इंदौर Shreephal Jain News 13/10/2022, 7:27:12 pm

जिनेंद्र भगवान की भक्ति ही हरती है हमारे सारे संकट

झिलमिल जैन (आस्था) | जीवन में धर्म करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है और जब हम मेहनत धर्म के लिए करते हैं, तभी पुण्य को इकट्ठा कर पाते हैं। जब पुण्य इकट्ठा हो जाता है, तब सारे काम अपने आप बन जाते हैं। शत्रु भी हमारा मित्र हो जाता है। यह सब पुण्य की ही महिमा है। इसे हम आकृत पुण्

इंदौर Shreephal Jain News 13/10/2022, 8:00:52 am

प्रभु भक्ति कैसे करें

झिलमिल जैन | जीवन में प्रभु भक्ति ही जीवन जीने का एक मात्र आधार है लेकिन हम सुख के समय अपने ही आराध्य प्रभु को भूल जाते हैं। शायद इसलिए दुखी हैं। अगर आज भी जितना समय हम दूसरों की बातो में और व्यर्थ के कार्य में लगाते हैं, उतना समय जिनेन्द्र भगवान की भक्ति में लगा दें तो हमारा जीव

इंदौर Shreephal Jain News 11/10/2022, 9:58:38 pm

डिनर को लेकर अमेरिका और यूरोप में नया रुझान

जैन मुनियों-संतों के सूर्यास्त से पहले भोजन के सिद्धान्तों पर लौटे चिकित्सा विशेषज्ञ अब वही सच साबित हुआ जिसका उल्लेख हमारे ऋषि-मुनियों, विशेषकर जैन संतों ने अपने ग्रंथों में भोजन को लेकर किया है। दुनिया में लोग अब अपने स्वास्थ्य को लेकर फिर सचेत हुए हैं। चाहे वह लेट-नाइट कल्चर व

इंदौर Shreephal Jain News 11/10/2022, 12:01:37 pm

आदिवासियों को पारंपरिक हुनर से जोडऩे की जरूरत : अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर

आज विश्व आदिवासी दिवस है। आदिवासी, जैसा कि उनके नाम से पता चलता है, उपमहाद्वीप के शुरुआती निवासी हैं और वर्तमान की तुलना में वे पूर्व में बहुत बड़े क्षेत्रों में रहते थे। बड़ा सवाल यह है कि हम वास्तव में भारत के आदिवासियों के बारे में कितना जानते हैं? क्या हमें उनके बारे में जानन

इंदौर संपादक 8/8/2022, 9:02:32 pm

कर्मं से न बंधकर मूल स्वरुप की रक्षा करना ही रक्षाबंधन हैं

मन में करुणा का भाव, अनुकम्पा, दया और वात्सल्य का अवलम्बन तभी रक्षाबंधन होगा सार्थक श्रीफल न्यूज़ के लिए प्रिया व्यास की रिपोर्ट https://youtu.be/h_2da3qCXCA वास्तव में कर्मों से न बंधकर मूल स्वूरप की रक्षा करना ही ‘रक्षाबंधन’ है। विष्णु कुमार मुनि ने बंधन को अपनाया। अपने पद को छो

इंदौर Shreephal Jain News 7/8/2022, 7:00:30 am

रक्षा वन्दन- अजित जैन,जयपुर

आज समय है, बंधन से परे वन्दन का। क्योंकि ... बंधन में गांठ भी है और मोह भी। वन्दन में गरिमा भी है और आदर भी बीते 5 दिन के हर पल, एक ऐसी दुनिया में बीते जहां लोग रक्षा के लिए समर्पित थे। बात चिकित्सालय की है। सरकारी अस्पताल की। एक ऐसी दुनिया, जहाँ हजारों लोग हैं। पर उन्हें सिर्फ द

इंदौर Shreephal Jain News 6/8/2022, 2:30:28 pm

पीछी में सोने-चाँदी की राखियाँ, वीतरागता या शिथिलाचार? - भावलिंगी संत श्रमणाचार्य विमर्शसागर मुनि

रक्षाबंधन पर्व पर विशेष................... रक्षाबंधन पर्व सिद्धांत की प्रयोगशाला में आचरण का शंखनाद है। जिनागम में सम्यक्त्वाचरण एवं संयमाचरण के जो सिद्धांत प्रतिपादित हैं, उनके परिप्रेक्ष्य में मुनि विष्णुकुमार और आचार्य अकंपनस्वामी आदि मुनिराज आचरण के प्रस्तोता हैं। सहज शुद्ध ज

इंदौर Shreephal Jain News 6/8/2022, 12:31:58 pm

अद्भुत थी तेइसवें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी की शोभा

जैन धर्म के तेइसवें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का 4 अगस्त को मोक्ष कल्याणक है। भगवान पार्श्वनाथ का समय ईसा पूर्व नवीं शताब्दी एवं भगवान महावीर से दो सौ पचास वर्ष पहले का माना गया है। उनका जन्म उग्र वंश काशी (वाराणसी) नरेश अश्वसेनजी (विश्वसेन) की महारानी ब्राह्मी(वामा) देवी

इंदौर Shreephal Jain News 31/7/2022, 11:30:43 am

संघर्ष से मुकाबला करना सिखाता है भगवान पार्श्वनाथ का जीवन चरित्र

मोक्ष सप्तमी पर विशेष आलेख रचनात्मक सूत्र प्रदान करती हैं तीर्थंकर पार्श्वनाथ की शिक्षाएं 04 अगस्त 2022 को मोक्ष सप्तमी लेखक - डॉ. सुनील जैन संचय तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म बनारस के राजा अश्वसेन और रानी वामादेवी के यहां पौष कृष्ण एकादशी के दिन हुआ था। जैन परंपरा में वर्तमान में

इंदौर Shreephal Jain News 28/7/2022, 1:26:42 pm

मोबाइल से बच्चों का बड़ा नुकसान

श्रीफल न्यूज के लिए प्रकाश श्रीवास्तव की रिपोर्ट जयपुर। प्रौद्योगिकी और धर्म विरोधी नहीं, बल्कि पूरक होते हैं। धर्म यही कहता है जो दिखता है वह प्रायः सत्य नहीं होता है। अतः जीवन में धर्म पर विश्वास करना चाहिए ताकि जीवन का कल्याण हो सके। धर्म और प्रौद्योगिकी के लिए एक नैतिक संहिता

इंदौर Shreephal Jain News 21/7/2022, 7:00:39 pm

दया, अहिंसा, करुणा और प्रेम का महापर्व है चातुर्मास

धर्म और अध्यात्म: चातुर्मास महापुण्य का अर्जन करने का साधन आलेख- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर चातुर्मास महापुण्य अर्जन करने का साधन है। यह समय अधिक से अधिक 165 दिन और कम से कम 100 दिन का होता है। इसमें संत प्रवचनों के द्वारा आमजन में धार्मिक भावना का प्रसार करते हैं। यह है अध्यात्म

इंदौर संपादक 12/7/2022, 10:58:45 am

जब अधर्मी, जैन धर्म को नुकसान पहुंचाने लगे तो उसे कुछ यूं बचाने आए भट्टारक

आलेख- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज धर्म पर अधर्म हावी होने के लिए जब-जब आगे बढ़ा तो संस्कृति के संरक्षण के लिए आचार्यों और मुनियों ने बलिदान दिया। आचार्य समंतभद्र, अकलंकदेव और निकलंक का बलिदान भुलाना असंभव है। पल-प्रतिपल घटने वाली बातें इतिहास का हिस्सा बनती जाती हैं। यह बलिदा

इंदौर संपादक 10/7/2022, 5:00:26 am

आओ जानें णमोकार मंत्र के महत्त्व को

णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूण आलेख- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज णमोकार मंत्र में विशिष्ट शुद्ध आत्मा को नमस्कार किया गया है । जिन्होनें अपने जीवन में अहिंसा को उतार लिया है तथा जिनकी सभी क्रिया अहिंसक है । यह आत्माएँ जैन संस्कृ

इंदौर संपादक 8/7/2022, 5:00:31 am

महान संत के बारे में कुछ लिखना सहज नहीं, पर उनसे जुड़े व्रतांतों से उनके तप, त्याग और संयम की प्रतिमूर्ति होने का पता चलता है...

श्रीफल के लिए सुरेश सबलावत की कलम से ऐसे ही आचार्य से जुड़े व्रतांत उनके 33 वें आचार्य पदारोहण दिवस पर साझा किए गए तीर्थंकर भगवान महावीर की परंपरा के सच्चे निर्वाहक आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का नाम जैन समुदाय में बड़ी श्रद्धा और गौरव के साथ लिया जाता है। भगवान महावीर के बताए

इंदौर Shreephal Jain News 3/7/2022, 9:54:18 pm

योग दिवस: योगासन में वज्रासन का महत्व जानिए

आलेख- डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’ इन्दौर। नियमित रूप से योग करने से शरीर, मन और आत्मा संतुष्ट रहती है। आजकल ऑफिस, घर और रिश्तों की वजह से ज्यादातर लोग परेशान रहते हैं, उनमें तनाव रहता है जिससे वे धीरे-धीरे मानसिक बीमारियों से घिर जाते हैं। लेकिन ऐसे में योग का महत्व समझा जा सकता

इंदौर Shreephal Jain News 21/6/2022, 12:41:04 am

विश्व योग दिवस पर विशेष: योग हमें खुद से मिलाता है

आलेख:- डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर। योग की उत्पत्ति प्राचीन समय में योगियों द्वारा भारत में हुई थी। योग का अर्थ है जुड़ना, मन को वश में करना और वृत्तियों से मुक्त होना। योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द से हुई है, जिसके दो अर्थ हैं :– पहला- जोड़ना और दूसरा– अनुशासन। योग का अभ्य

इंदौर Shreephal Jain News 20/6/2022, 11:57:20 pm

अतिशयकारी टीले वाले बाबा: दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीरजी

प्रस्तुति-अदिति सेठी, जयपुर अटूट आस्था और विश्वास का अद्भुत केंद्र जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के प्रति देश-दुनिया में लोगों की अपार श्रद्धा है और श्रद्धालुओं की यही अटूट श्रद्धा और विश्वास है राजस्थान के करौली जिले के हिंडौन उपखण्ड में गंभीर नदी के पश्चिमी तट

इंदौर Shreephal Jain News 20/6/2022, 9:40:26 pm

पर्यावरण दिवस 5 जून 2022 पर विशेष : कल के उजाले की आस देता दिन

पर्यावरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘परि’ + ‘आवरण’। ‘परि’ का अर्थ है- चारों ओर और ‘आवरण’ का अर्थ है-घेरा। वह घेरा जो हमारे चारों ओर व्याप्त है और जिसमें हम जन्मते, बढ़ते व जीवनयापन करते हैं, पर्यावरण कहलाता है। पूरी दुनिया में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस

इंदौर Shreephal Jain News 4/6/2022, 8:30:27 pm