📚 कथा सागर

कथा सागर

जैन पुराणों एवं ग्रंथों से प्रेरणादायक कथाएं

स्वाध्याय - 10 : श्रवणबेलगोला के भगवान बाहुबली की मूर्ति की ऊंचाई का वर्णन

श्रवणबेलगोला के भगवान बाहुबली की मूर्ति की ऊंचाई - 58.8 फीट पांव की ऊंचाई - 2’8’’ पांव की आदि से घुटने तक - 15’2’’ पांव की आदि से कमर रेखा तक - 31’4’’ पांव की आदि से नाभि तक - 34’1’’ पांव की आदि से गर्दन रेखा तक - 45’10’’ पांव की आदि से गर्दन तक - 57’8’’ घुटने से कमर रेखा तक - 16

श्रवणबेलगोला संपादक 18/3/2021, 10:57:17 pm

स्वाध्याय - 9 : ऐरावत हाथी का वर्णन

ऐरावत हाथी एक लाख योजन विस्तार वाला होता है। एक ऐरावत हाथी के 32 मुख होते हैं। एक एक मुख पर चार चार दांत। प्रत्येक दांत पर एक एक तालाब होता है। एक एक तालाब पर एक एक कमल वनखण्ड होता है। एक एक कमल खण्ड पर 32 महापद्म होते हैं तथा वह एक एक महापद्म पर एक एक योजन प्रमाण वाला होता है। ए

इंदौर संपादक 18/3/2021, 10:53:15 pm

स्वाध्याय - 8 : अष्ट प्रातिहार्य

देवों के द्वारा रचित अशोक वृक्ष आदि को प्रातिहार्य कहते हैं। वे आठ होते हैं-1. अशोक वृक्ष, 2. तीन छत्र, 3. रत्नजड़ित सिंहासन, 4. दिव्यध्वनि, 5. दुन्दुभिवाद्य, 6. पुष्पवृष्टि, 7. भामण्डल, 8. चौंसठ चवर । 1. अशोक वृक्ष - समवसरण में विराजित तीर्थंकर के सिंहासन के पीछे-मस्तक के ऊपर तक

इंदौर संपादक 16/3/2021, 11:27:35 pm

स्वाध्याय - 7 : अरिहंत परमेष्ठी के देवकृत 14 अतिशय

1. अर्धमागधी भाषा-भगवान् की अमृतमयी वाणी सब जीवों के लिए कल्याणकारी होती है तथा मागध जाति के देव उन्हें बारह सभाओं में विस्तृत करते हैं। 2. मैत्रीभाव-प्रत्येक प्राणी में मैत्री भाव हो जाता है। जिससे शेर-हिरण, सर्प-नेवला भी बैर-भाव भूलकर एक साथ बैठ जाते हैं। 3. दिशाओं की निर्मलता

इंदौर संपादक 16/3/2021, 11:25:32 pm

स्वाध्याय - 6 : अरिहंत परमेष्ठी के केवलज्ञान के 10 अतिशय

1. भगवान् के चारों ओर सौ-सौ योजन (चार कोस का एक योजन,एक कोस में दो मील एवं 1.5 कि.मी. का एक मील) तक सुभिक्षता हो जाती है अर्थात् अकाल आदि नहीं पड़ते हैं। 2. आकाश में गमन-कमल से चार अर्जुल ऊपर विहार (गमन) होता है। 3. चतुर्दिग्मुख-एक मुख रहता है, किन्तु चारों दिशाओं में दिखता है। 4

इंदौर संपादक 16/3/2021, 11:23:25 pm

स्वाध्याय - 5 : अरिहंत परमेष्ठी के जन्म के 10 अतिशय

1. अतिशय सुन्दर शरीर, 2. अत्यन्त सुगंधित शरीर, 3. पसीना रहित शरीर, 4. मल-मूत्र रहित शरीर। 5. हित-मित-प्रिय वचन, 6. अतुल बल, 7. सफेद खून, 8. शरीर में 1008 लक्षण होते हैं। जिसमें शंख,गदा, चक्र आदि 108 लक्षण तथा तिल मसूरिका आदि 900 व्यञ्जन होते हैं, 9. समचतुरस्र संस्थान, 10. वज़ऋषभन

इंदौर संपादक 16/3/2021, 11:21:31 pm

स्वाध्याय - 4 : वास्तु शास्त्र

आदिकाल से ही हमारे पूर्वज वास्तु के अनुसार भवनों को निर्माण करते रहे हैं। हमारे देश में जितनी भी ऐतिहासिक इमारतें एवं भवन है उन सभी में वास्तु के सिद्धान्तों का उपयोग किया गया है। सभी राजाओं ने अपने किलों एवं महलों का निर्माण करते समय इसकी वैज्ञानिक उपयोगिता को समझते हुए इस कला क

इंदौर संपादक 8/2/2021, 2:22:00 pm

स्वाध्याय - 3 : तीर्थंकर की माता के सोलह स्वप्न-प्रस्तुति -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर

तीर्थंकर के गर्भ में आने से पहले उनकी माता सोलह स्वप्न देखती उन स्वप्नों के नाम और उनका फल आप सब भी जानें। पहला स्वप्न - एक अति विशाल श्वेत हाथी दिखाई दिया।ज्योतिष शास्त्र के विद्वान राजा सिद्धार्थ ने पहले स्वप्न का फल बताया कि उनके घर एक अद्भुत पुत्र-रत्न जन्म लेगा। दूसरा स्वप्न

इंदौर संपादक 13/1/2021, 2:19:00 pm

स्वाध्याय - 2 : चंद्रगुप्त के सोलह स्वप्न- प्रस्तुति अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर

डूबते हुए सूर्य का दर्शन - यह इस बात का संकेत है कि महावीर के मार्ग को प्रकाशित करने वाला आगम का ज्ञान उत्तरोत्तर अस्त होता हुआ समाप्त होगा। कल्पवृक्ष की शाखा का भंग - यह इस बात का संकेत कि भविष्य में राजपुरुष वैराग्य धारण नहीं करेंगे। सछिद्र चन्द्रमण्डल - यह इस बात का संकेत है क

इंदौर संपादक 13/1/2021, 2:17:00 pm

स्वाध्याय - 1 : ‘सूर्यास्त पश्चात भोजन विषाक्त कैसे हो जाता है?’ -अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

भारतीय और जैन संस्कृति में साधना, ध्यान, त्याग और संयम को महत्त्व दिया गया है। यह कहा जा सकता है कि इनके बिना भारतीय और जैन संस्कृति की पहचान ही नहीं हो सकती है। साधना सत्य आचरण के बिना अधूरी है। आचरण के बिना मानव अधूरा है । कुल मिलाकर सब एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। संस्कृति का न

इंदौर संपादक 8/10/2020, 2:08:00 pm

पहला भाग

छहढाला के रचयिता का परिचय अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज की कलम से पंडित दौलतराम जी का जन्म हाथरस निवासी टोडरमल जी के यहा पर हुआ था । जाति पल्लीवाल और गोत्र गंगीरीवाल थी । आप का जन्म लगभग 1855 या 1856 का है। कपड़े पर छपाई का काम करते थे । छपाई करते करते आप गोम्मटसार,त्रिलोकसार

इंदौर संपादक 25/5/2020, 10:46:43 am

सफलता का रहस्य

एक कवि किसी प्रसिद्द और सफल मूर्तिकार से मिलने गया। उसकी कला वाटिका में उपस्थित शिल्प की सराहना करते हुए उसने मूर्तिकार से पूछा, ‘आपकी अद्वितीय कला का रहस्य क्या है? वह कौन सा दर्शन है जो आपको ये अनूठे शिल्प और मूर्तियाँ बनाने के लिए प्रेरित करता है?’‘तुम वह रहस्य जानना चाहते हो?

इंदौर संपादक 22/2/2020, 12:45:25 pm