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जीवनशैली एवं प्रेरणादायक आलेख

जीवन का प्रबंधन - यत्न पूर्वक चेष्टा करें : बैठने और उठने के वैज्ञानिक तरीके - भगवान महावीर की दृष्टि में

हमारे मन में सहज ही यह भाव आ सकता हैं कि हमारे उठने-बैठने से शरीर पर या किसी को क्या फर्क पड़ सकता है। परंतु इसका हम गहराई से अध्ययन करें तो यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह तो एक जीवन जीने की कला के रूप में है। उठने-बैठने से तात्पर्य यह है कि शारीरिक रोगों पर भी उसका नियंत्रण करना है।

इंदौर Shreephal Jain News 2/3/2025, 8:08:26 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : प्रकृति के साथ जिएं-भगवान महावीर की दृष्टि में।

प्रयास करें कि जीवनचर्या प्रकृति के नियमों के अनुरूप चले। प्रकृति का सहज नियम है कि रात सोने के लिए, दिन जागने के लिए है। बच्चा हो युवा या बूढ़ा, सर्विसमेन, हो या बिजनैसमेन या फिर विद्यार्थी, सभी को निरन्तर और ऊर्जावान बने रहने के लिए रात में 10-11 बजे तक सो जाना चाहिए और सुबह 5-6

इंदौर Shreephal Jain News 1/3/2025, 8:00:04 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : किसी से मत लड़ो, आगे बढ़ो- भगवान महावीर की दृष्टि में

प्रतिस्पर्धा के इस युग में लौकिक या आध्यात्मिक कोई भी ऐसा मार्ग नहीं जहाँ आपसे असंतुष्ट लोगों का समूह न हो। आप उसकी चिंता न करते हुए आगे बढ़ने का संकल्प प्रतिदिन करते जाएँ। किसी को प्रत्युत्तर देने में अपना समय और शक्ति बर्बाद न करें। आप देखेंगे कि धीमे-धीमे आपमें और पीछे वालों मे

इंदौर Shreephal Jain News 28/2/2025, 8:00:25 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : टाईम मेनेज लाइफ डेमेज - भगवान महावीर की दृष्टि में

टालम-टोल करने का रवैया आपके लिए चिंता बनाये ही रखेगा। यदि आप किसी काम को नहीं करना चाहते हैं तो आप स्पष्ट रूप से विनम्रता से मना करने का साहस भी रखें। हमेशा हाँ, करने की आदत भी आपको परेशान कर सकती है। समय आपका है, काम मर्जी के अनुरूप है तो ही करें अन्यथा समय, सामग्री और ऊर्जा बर्

इंदौर Shreephal Jain News 27/2/2025, 8:00:05 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : एकाग्रता, जीवन की समग्रता- भगवान महावीर की दृष्टि में

मन-वचन-काय तीनों के प्रयास संयत हों। संयत प्रयास ही जीवन में संतुलन बनाते हैं। यही संतुलन आदमी को निश्चिंत बनाता है। निश्चिंत होना ही ध्यान है। ध्यान एकाग्रता का नाम है, एकाग्रता है तो स्थिरता है और स्थिरता ही जीवन की सफलता है। मुनिश्री प्रणम्य सागर जी महाराज की पुस्तक खोजो मत पा

इंदौर Shreephal Jain News 26/2/2025, 8:00:37 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : टी.वी. बच्चों को बनाती है ऐबी - भगवान महावीर की दृष्टि में

बच्चों पर टी.वी. देखने से मानसिक कुप्रभाव सबसे ज्यादा और गहरे समय तक के लिए पड़ता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि टी.वी. देखने से बच्चों में पढ़ाई की रुचि कम हो जाती है। इसका कारण है कि टी.वी. के मनोरंजन से मन पर गहरा असर होना। कम्प्यूटर, वीडियोगेम, सुपरमैन, कार्टून फिल्म, आकर्षक विज

इंदौर Shreephal Jain News 25/2/2025, 8:00:17 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : दैनिक जीवन में इन्हें अपनाओ - भगवान महावीर की दृष्टि में

दैनिक जीवन की सभी छोटी-बड़ी प्रवृत्ति सावधानीपूर्वक करें। ‘आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत‘ इस प्राचीन सूत्र के अनुसार ऐसा कोई भी आचरण न करें, जो दूसरों के लिए प्रतिकूल हो। मुनिश्री प्रणम्य सागरजी महाराज की पुस्तक खोजो मत पाओ व अन्य ग्रंथों के माध्यम से श्रीफल जैन न्यूज Life M

इंदौर Shreephal Jain News 24/2/2025, 8:00:50 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : पानी बचाओ बिजली बुझाओ - भगवान महावीर की दृष्टि में

मन-वचन-काय की प्रत्येक एक्टिविटी (क्रिया) में सावधानी हो। ऐसी सावधानी जिससे बाद में दण्ड न भुगतना पडे़, पछताना न पडे़। महावीर भगवान् ने इसके लिए एक शब्द दिया ‘अनर्थदण्ड त्याग‘ अनर्थ का मतलब वह काम जिसका कोई अर्थ/प्रयोजन/सार न हो और दण्ड का मतलब पाप। बिना प्रयोजन के पाप करना छोड़ो।

इंदौर Shreephal Jain News 23/2/2025, 8:00:14 am

ईश्वर में विश्वास रखकर अपने लक्ष्य को पूरा करें : बड़े लक्ष्यों के लिए छोटे-छोटे स्वार्थ छोड़ दें

सूत्र वाक्य छोटे होते हैं लेकिन उनका निर्माण बडे़ अनुभवों के आधार पर होता है। महापुरुषों ने जो कुछ भी कहा, सूत्रात्मक ही कहा। सूत्र वाक्य ही सूक्तियां कहलाती हैं। चिन्तन से सूत्रों का अर्थ खुलता है। धर्म के अन्तिम संचालक, तीर्थ के प्रवर्तक, चौबीसवें तीर्थंकर भगवान् महावीर स्वामी

इंदौर Shreephal Jain News 22/2/2025, 8:00:10 am

स्पर्धा में होता है अपनी योग्यता को बढ़ाने का संकल्प : प्रतिस्पर्धा में पलता है द्वेष

सूत्र वाक्य छोटे होते हैं लेकिन उनका निर्माण बडे़ अनुभवों के आधार पर होता है। महापुरुषों ने जो कुछ भी कहा, सूत्रात्मक ही कहा। सूत्र वाक्य ही सूक्तियां कहलाती हैं। चिन्तन से सूत्रों का अर्थ खुलता है। धर्म के अन्तिम संचालक, तीर्थ के प्रवर्तक, चौबीसवें तीर्थंकर भगवान् महावीर स्वामी

इंदौर Shreephal Jain News 21/2/2025, 8:00:52 am

अपने स्वाभिमान को अभिमान समझकर छोड़ें : धैर्य होने पर हो सकते हैं हर स्थिति में सफल

सूत्र वाक्य छोटे होते हैं लेकिन उनका निर्माण बडे़ अनुभवों के आधार पर होता है। महापुरुषों ने जो कुछ भी कहा, सूत्रात्मक ही कहा। सूत्र वाक्य ही सूक्तियां कहलाती हैं। चिन्तन से सूत्रों का अर्थ खुलता है। धर्म के अन्तिम संचालक, तीर्थ के प्रवर्तक, चौबीसवें तीर्थंकर भगवान् महावीर स्वामी

इंदौर Shreephal Jain News 20/2/2025, 8:00:29 am

मरते को बचाने वाला मानव है : किसी की खुशी के लिए किसी और की खुशी की प्राणों की बलि मत चढ़ाओ

सूत्र वाक्य छोटे होते हैं लेकिन उनका निर्माण बडे़ अनुभवों के आधार पर होता है। महापुरुषों ने जो कुछ भी कहा, सूत्रात्मक ही कहा। सूत्र वाक्य ही सूक्तियां कहलाती हैं। चिन्तन से सूत्रों का अर्थ खुलता है। धर्म के अन्तिम संचालक, तीर्थ के प्रवर्तक, चौबीसवें तीर्थंकर भगवान् महावीर स्वामी

इंदौर Shreephal Jain News 19/2/2025, 8:00:56 am

पुत्री कही जाती है ‘उभयकुलवर्धिनी‘ : कुल की मर्यादा का पालन करने वाली स्त्री ही सुखी

सूत्र वाक्य छोटे होते हैं लेकिन उनका निर्माण बडे़ अनुभवों के आधार पर होता है। महापुरुषों ने जो कुछ भी कहा, सूत्रात्मक ही कहा। सूत्र वाक्य ही सूक्तियां कहलाती हैं। चिन्तन से सूत्रों का अर्थ खुलता है। धर्म के अन्तिम संचालक, तीर्थ के प्रवर्तक, चौबीसवें तीर्थंकर भगवान् महावीर स्वामी

इंदौर Shreephal Jain News 18/2/2025, 8:00:28 am

प्रेम उससे करो, जिसे तुम नहीं भी चाहते हो : प्रेम असीमित होता है और प्यार सीमित

सूत्र वाक्य छोटे होते हैं लेकिन उनका निर्माण बडे़ अनुभवों के आधार पर होता है। महापुरुषों ने जो कुछ भी कहा, सूत्रात्मक ही कहा। सूत्र वाक्य ही सूक्तियां कहलाती हैं। चिन्तन से सूत्रों का अर्थ खुलता है। धर्म के अन्तिम संचालक, तीर्थ के प्रवर्तक, चौबीसवें तीर्थंकर भगवान् महावीर स्वामी

इंदौर Shreephal Jain News 17/2/2025, 8:00:43 am

मित्रता और यारी में अंतर को जानना जरूरी: जीवन में ऐसे मित्रों का चयन करें जो आपके सुख-दुःख में साथ दें

सूत्र वाक्य छोटे होते हैं लेकिन उनका निर्माण बडे़ अनुभवों के आधार पर होता है। महापुरुषों ने जो कुछ भी कहा, सूत्रात्मक ही कहा। सूत्र वाक्य ही सूक्तियां कहलाती हैं। चिन्तन से सूत्रों का अर्थ खुलता है। धर्म के अन्तिम संचालक, तीर्थ के प्रवर्तक, चौबीसवें तीर्थंकर भगवान् महावीर स्वामी

इंदौर Shreephal Jain News 15/2/2025, 8:00:08 am

स्वास्थ्य और अहिंसा की ओर कदम : भगवान महावीर के मार्गदर्शन में समझें पैदल चलने का महत्व

सूत्र वाक्य छोटे होते हैं लेकिन उनका निर्माण बडे़ अनुभवों के आधार पर होता है। महापुरुषों ने जो कुछ भी कहा, सूत्रात्मक ही कहा। सूत्र वाक्य ही सूक्तियां कहलाती हैं। चिन्तन से सूत्रों का अर्थ खुलता है। धर्म के अन्तिम संचालक, तीर्थ के प्रवर्तक, चौबीसवें तीर्थंकर भगवान् महावीर स्वामी

इंदौर संपादक 14/2/2025, 8:04:04 am

26 दिसंबर को मनाया जाएगा भगवान चंद्रप्रभ का जन्म और तपकल्याणक : जानिए भगवान चंद्रप्रभ के देश भर के प्रमुख अतिशय क्षेत्रों के बारे में

भगवान चंद्रप्रभ का जीवन तपस्या और साधना से परिपूर्ण था, और उनके जीवन के कई प्रसंगों से भक्तों को प्रेरणा मिलती है। 26 दिसंबर को भगवान चंद्रप्रभु के जन्मकल्याणक और तपकल्याणक के अवसर पर जैन समाज इन अतिशय क्षेत्रों में जाकर उनकी पूजा अर्चना करेगा और चमत्कारी दर्शन का लाभ उठाएगा। पढ़

इंदौर Rekha Jain 25/12/2024, 8:00:27 pm

26 दिसंबर को भगवान पार्श्वनाथ का जन्म और तप कल्याणक मनाया जाएगा : जानिए भगवान पार्श्वनाथ के देश भर के प्रमुख अतिशय क्षेत्रों के बारे में

भगवान पार्श्वनाथ की जीवनगाथाएं, उनके उपदेश और उनके चमत्कारी कार्य आज भी लाखों भक्तों को प्रेरित करते हैं। उनकी जन्मजयंती पर आयोजित होने वाले आयोजनों में लाखों भक्त हिस्सा लेंगे और भगवान पार्श्वनाथ से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। पढ़िए संपादक रेखा संजय जैन और सहयोगी प्रीतम लखवाल की यह

इंदौर Rekha Jain 25/12/2024, 6:00:26 am

बाल दिवस के उपलक्ष्य में बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधी आलेखों की विशेष शृंखला-5 : जानें बच्चों की सेहत के लिए पेरेंट्स को क्या करना चाहिए

बाल दिवस, जिसे "चिल्डर्न्स डे" के नाम से भी जाना जाता है,हर साल 14 नवम्बर को मनाया जाता है। यह दिन बच्चों के अधिकारों, उनके विकास और शिक्षा के महत्व को उजागर करने के लिए समर्पित होता है। बाल दिवस का उद्देश्य बच्चों को स्वस्थ, खुशहाल और सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अधिकार दिल

इंदौर Rekha Jain 14/11/2024, 5:30:50 am

बाल दिवस के उपलक्ष्य में बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधी आलेखों की विशेष शृंखला-4 : बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है विटामिन डी

बाल दिवस, जिसे "चिल्डर्न्स डे" के नाम से भी जाना जाता है, हर साल 14 नवम्बर को मनाया जाता है। यह दिन बच्चों के अधिकारों, उनके विकास और शिक्षा के महत्व को उजागर करने के लिए समर्पित होता है। बाल दिवस का उद्देश्य बच्चों को स्वस्थ, खुशहाल और सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अधिकार दि

इंदौर Rekha Jain 13/11/2024, 12:35:49 pm