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जीवनशैली एवं प्रेरणादायक आलेख

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : मस्तिष्क का विज्ञान-भगवान महावीर की दृष्टि में

डॉ. विनोद शर्मा अपनी पुस्तक मस्तिष्क विज्ञान और पढाई आसान में कहते है-‘हमारे दिमाग का सबसे महत्वपूर्ण काम है सूचनाओ को सही तरीके से एकत्रित करना और जरूरत पड़ने पर पुनः प्राप्त करना। जिसे हम री-कलेक्शन कहते है। इन्फॉर्मेशन को प्राप्त करना कहलाता है। याद करना यानी मेमोराइजेशन, दिमाग

इंदौर Shreephal Jain News 22/3/2025, 8:00:18 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : पहले तोलो, फिर बोलो-भगवान महावीर की दृष्टि में

शब्दों का प्रयोग करने से पहले उसे मन के तराजू में तोल लेना चाहिए। यदि वह शब्द आपको अच्छे लगते हैं तभी वह दूसरों को प्रभावित कर पाएंगे, यदि आपको वह शब्द कड़वे लगते हैं तब वह शब्द दूसरों को भी उतने ही बुरे लगेंगे। ‘ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोये। औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।‘ संत

इंदौर Shreephal Jain News 21/3/2025, 8:00:47 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : शब्द की ताकत शस्त्र से ज्यादा होती है-भगवान महावीर की दृष्टि में

शब्द के बगैर मानव गूंगा ही है साथ ही बेकार और आधारहीन है। मुनि विनय कुमार आलोक कहते है-‘शब्दों की ताकत, तलवार और गोली की ताकत से भी अधिक होती है। शब्दों के प्रभाव की सीमा को परिभाषित करना मुश्किल है। वेद में तो शब्द को ब्रह्म कहा गया है। शब्दों का यदि समझदारी के साथ उचित उपयोग कि

इंदौर Shreephal Jain News 20/3/2025, 8:00:16 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : अधिक बोलना उथलापन है- भगवान महावीर की दृष्टि में

सभी व्यक्तियों का स्वभाव अलग-अलग होता है। हम किसी की तुलना किसी से नहीं कर सकते। परंतु बोलने के संदर्भ में हम यह अवश्य कह सकते हैं कि किसी को भी हम टका-सा जवाब न दें। हमारी वाणी किसी के मन को तीर की तरह न चुभे। सोच-संभलकर बोले। यदि हमारा उद्देश्य कम शब्दों में पूरा होता हो तो ज्य

इंदौर Shreephal Jain News 19/3/2025, 8:00:15 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें: वचन संयम, मौन अभ्यास-भगवान महावीर की दृष्टि में

वर्तमान युग में हम सभी को कभी न कभी गुस्सा आता ही है और जब हमें गुस्सा आता है तो क्या होता है ? उस समय होता यह हैं कि हमारा स्वयं पर नियंत्रण नहीं रहता और हमें यह भी नहीं पता चलता कि हम क्या कर रहे है। जब हमें क्रोध आता है तो हमें सबसे बड़ी हानि यह होती है कि हम उस वक्त कुछ भी उल्

इंदौर Shreephal Jain News 18/3/2025, 8:00:47 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : शतपदगामी वामपार्श्वशायी - भगवान महावीर की दृष्टि में

हमारी यानि विशेषकर शहरी लोगों की डाईट खराब होती जा रही है। क्योंकि डाईट में मैदा, प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड और मसालेदार चीजों को खाने का चलन बहुत अधिक बढ़ता चला जा रहा है। जिसका सीधा असर हमारी पाचन क्रिया पर पड़ रहा है। अनहेल्दी फूड्स को खाने के बाद पेट फूलना, खट्टी डकारे और अपच जैस

इंदौर Shreephal Jain News 17/3/2025, 8:00:29 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : शाकभुक् - शाकाहारी भोजन - भगवान महावीर की दृष्टि में

शाकाहारी भोजन करने का अर्थ यह हैं कि शुद्ध और सात्विक भोजन किया जाना चाहिये। इसे हम यू भी समझ सकते हैं कि किसी भी जीव जिसमें जीवन का अंश हो उसे रंच मात्र भी छेडे़ बिना हम भोजन करते हो वह शाकाहारी की श्रेणी में आता है। शाकाहारी भोजन करना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है। शाकाहारी भोजन

इंदौर Shreephal Jain News 16/3/2025, 8:00:02 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : मितभुक् - परिमित भोजन- भगवान महावीर की दृष्टि में

परिमित भोजन का अर्थ यह हैं कि उचित मात्रा में भोजन को ग्रहण करना है। वह भोजन जो गरिष्ठ न हो और हमें बीमारियों से बचाने वाला हो। जो स्मरण शक्ति को भी कमजोर न करें। एक नियंत्रित मात्रा में ही भोजन करें। जिस मात्रा में हमारा शरीर दिनचर्या के कार्य करने हेतु ऊर्जा प्राप्त करना चाहता

इंदौर Shreephal Jain News 15/3/2025, 8:00:41 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : हितभुक्-हितकारी भोजन - भगवान महावीर की दृष्टि में

हितकारी आहार से आशय यह हैं कि कुछ भोजन ऐसे होते हैं जिनकी तासीर अथवा गुण आपस में मिलते है। इसका अर्थ यह हैं कि ये एक-दूसरे के अनुकूल होते है, जिन्हे हम हितकारी आहार कह सकते है। लगातार हितकारी आहार का सेवन करने से पाचन तंत्र के साथ-साथ शरीर के अन्य अंगों पर भी इसका सकारात्मक प्रभा

इंदौर Shreephal Jain News 14/3/2025, 8:00:05 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : भोजन रात्रि में न करें - भगवान महावीर की दृष्टि में

सोने और जागने का सभी का समय अलग-अलग हो सकता है। परंतु एक निश्चित समय पर सोना और जागने के नियम का हम पालन करें तो इसके परिणाम सकारात्मक रुप में हमारे सामने आ सकते हैं। जिसका हमें लाभ ही होगा। निश्चित रुप से हानि तो कतई नहीं होगी। समय से कार्यों को करना तो एक जीवन जीने की कला के रु

इंदौर Shreephal Jain News 13/3/2025, 3:21:51 pm

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : नींद न आने पर क्या करें-भगवान महावीर की दृष्टि में

रात्रि में अच्छी नींद आये। इस हेतु सर्वप्रथम तो अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करें। एक समय निश्चित कर लें कि इस दरमियान कुछ भी हो सोने हेतु समय देना है। मनोरंजन और टीवी चैनलों के मायाजाल में नहीं उलझना है। ओटीटी जैसे प्लेटफॉर्म का एक सीमित समय के लिए उपयोग करना है। जिसमें स्वच्छंदता

इंदौर Shreephal Jain News 12/3/2025, 8:00:21 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : रात्रि में नींद क्यों नहीं आती इसके कुछ कारण हैं-भगवान महावीर की दृष्टि में।

रात्रि में नींद न आने के ऐसे बहुत से कारण है। इसमें सबसे पहला कारण तो दिनचर्या का अस्त-व्यस्त होना है। इसके अलावा समय से सोना सभी भूल चुके है। इसका सबसे बड़ा कारण मनोरंजन और टीवी चैनलों की भरमार होने के अलावा ओटीटी जैसे प्लेटफॉर्म का आगमन भी है। जिसमें स्वच्छंदता से बहुत कुछ दिखाय

इंदौर Shreephal Jain News 11/3/2025, 8:00:42 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : बच्चों के शयन का तरीका देखकर माता-पिता जानें उनकी मानसिकता-भगवान महावीर की दृष्टि में।

माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिये कि वे स्वयं तो शयन का सही तरीका अपनाये। साथ ही अपने बच्चों के शयन करने के तरीके पर भी ध्यान दें। उनकी गतिविधियॉ किस तरह की है इस पर नजर अवश्य ही रखें। दिए गए तरीकों को ध्यान रख उनका पालन करने हेतु बच्चों को सीख हमेशा देते रहें। मुनि श्री प्रणम्य

इंदौर Shreephal Jain News 10/3/2025, 8:00:40 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : शयन का तरीका- भगवान महावीर की दृष्टि में

सदैव बाँयी करवट दोनों पैर पेट की ओर मुड़े हुए हो और सीधे या धनुषाकार लेटकर शयन करे। यह सोने का तरीका सर्वोत्तम है और उचित भी जिससे नींद भी अच्छी आयेगी और शारीरिक थकान भी दूर हो सकेगी। मानसिक और शारीरिक रुप से हम स्वस्थ है यह महसूस करेंगे। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की पुस्तक

इंदौर Shreephal Jain News 9/3/2025, 8:00:49 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : सोने और उठने के समय की सावधानियां-भगवान महावीर की दृष्टि में

असल में देखा जाये तो हमारे सोने और उठने के समय की सावधानियों को हम ध्यान में रखें तो हमारी दिनचर्या भी सकारात्मक दिशा की ओर जाती हुई नजर आयेंगी। इसके अलावा स्वस्थ और निरोगी रहने में हमें मदद अवश्य ही मिलेगी। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की पुस्तक खोजो मत पाओ व अन्य ग्रंथों के

इंदौर Shreephal Jain News 8/3/2025, 8:00:24 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : कब सोवें कब जागें- भगवान महावीर की दृष्टि में

सोने और जागने का सभी का समय अलग-अलग हो सकता है। परंतु एक निश्चित समय पर सोना और जागने के नियम का हम पालन करें तो इसके परिणाम सकारात्मक रुप में हमारे सामने आ सकते हैं। जिसका हमें लाभ ही होगा। निश्चित रुप से हानि तो कतई नहीं होगी। समय से कार्यों को करना तो एक जीवन जीने की कला के रु

इंदौर Shreephal Jain News 7/3/2025, 8:00:07 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें-खोजो मत पाओ: भगवान महावीर की दृष्टि में

खुशी को खोजने के लिए बाहरी सुख-सुविधाओं की उपलब्धि का प्रयास एक हद तक ही काम करता है पूर्णतः नहीं। हममें से हर एक के पास सब कुछ है। जो लोग कुछ को ही सब कुछ समझकर आनन्द से भर जाते हैं वे ही सब कुछ पाते हैं। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की पुस्तक खोजो मत पाओ व अन्य ग्रंथों के म

इंदौर Shreephal Jain News 6/3/2025, 8:00:27 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : एकाग्रता, जीवन की समग्रता-भगवान महावीर की दृष्टि में

सुबह-शाम थोड़ा समय सामायिक में बैठने के लिए निकालें। सामायिक का अर्थ है समत्व से भर जाना। हमारे अन्दर सुख-दुख, अमीरी-गरीबी, अभाव-सद्भाव, बुराई-अच्छाई, प्रेम-द्वेष सब कुछ भरा है। सामायिक का अर्थ है-‘इन जोड़ों में से अच्छाई को, सुख को, समृद्धि को चुनना हैं। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी

इंदौर Shreephal Jain News 5/3/2025, 8:00:33 am

जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें-निकम्मे न बैठें-खोजो मत पाओ: भगवान महावीर की दृष्टि में

निकम्मे बैठने से भी समय बर्बाद होता है और व्यर्थ की गप-शप करने से भी समय खराब होता है। इस तरह से समय बर्बाद करने वाला आदमी जिन्दगी की दौड़ में पीछे रह जाता है। आप भाग्य भरोसे बैठे रहकर अपनी योग्यता को न गवाएँ। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की पुस्तक खोजो मत पाओ व अन्य ग्रंथों क

इंदौर Shreephal Jain News 4/3/2025, 8:00:26 am

जीवन का प्रबंधन - यत्न पूर्वक चेष्टा करें : उदास न बैठें-भगवान महावीर की दृष्टि में

जब भी आप उदास हों, आप अपने मुख की भाव-भंगिमा को अच्छा बनाने की कोशिश करें। आप परेशानी में भी अपने हृदय में अच्छे विचार रखने का प्रयास करें। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की पुस्तक खोजो मत पाओ व अन्य ग्रंथों के माध्यम से श्रीफल जैन न्यूज का कॉलम Life Management निरंतरता लिए हुए

इंदौर Shreephal Jain News 3/3/2025, 8:00:51 am