🧘 राजस्थान के संत

राजस्थान के संत

राजस्थान के महान जैन संतों का परिचय एवं जीवनी

मुनिश्री महनंदी की रचनाओं में भाषा उच्चकोटि की और शुद्ध और सुपाठ्य भी: कवि ने छोटे-छोटे दोहों में सुंदर भावों को भरा है

भारत के संक्रमण काल में राजस्थान के जैन संतों ने देश के जीवन को सदा उच्च बनाए रख। यहां की संस्कृति और साहित्य को विनाश होने से बचाया। ऐसे ही संतों की श्रेणी में मुनिश्री महनंदी भी हैं। जैन धर्म के राजस्थान के दिगंबर जैन संतों पर एक विशेष शृंखला में 20वीं कड़ी में श्रीफल जैन न्यूज

इंदौर Shreephal Jain News 17/3/2025, 6:00:50 am

भट्टारक जगतकीर्ति ने साहित्य और प्रतिष्ठाओं के माध्यम से अलख जगाई: इनकी विद्वत्ता के चलते कई श्रावक बने अनुयायी

राजस्थान में आलोच्य समय में 1450 से 1750 तक सैकड़ों जैन संत हुए। जिन्होंने अपने महान व्यक्तित्व से देश, समाज और साहित्य की सेवा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। यहां हमने राजस्थान के चुनिंदा जैन संतों के बारे में परिचय देने का यह उपक्रम किया है। जैन धर्म के राजस्थान के दिगंबर जैन संतों

इंदौर Shreephal Jain News 16/3/2025, 6:00:09 am

भट्टारक सुरेंद्रकीर्तिजी के काल में आमेर शास्त्र भंडार की प्रगति रही शानदार: पूरे राजस्थान पर अपना प्रभाव स्थापित किया

राजस्थान की धरती पर जैन संतों ने अपनी विद्वता, साहित्य धर्मिता निभाकर जन-जन को आंदोलित किया। धर्म और साहित्य के दम पर जैन धर्म की नींव को मजबूत करने के लिए संतों ने कोई कमी नहीं छोड़ी। शिष्य परंपरा की अनूठी मिसाल यहां देखने में आती है जो अन्यत्र नहीं नजर आती। भट्टारक सुरेंद्रकीर्

इंदौर Shreephal Jain News 15/3/2025, 6:00:32 am

भट्टारक नरेंद्रकीर्ति जी ने अमूल्य साहित्य का सृजन और संरक्षण किया: राजस्थान की धरती पर बड़ी तादाद में रचा गया हिन्दी साहित्य

राजस्थान के जैन संतों में भट्टारक नरेंद्रकीर्ति जी का अलग ही स्थान है। इन्होंने अमूल्य साहित्य का सृजन किया और हिन्दी साहित्य का ग्रंथ संग्रहालय में संरक्षित भी करवाया। इनका पट्टााभिषेक सांगानेर में हुआ था। ये भट्टारक देवेंद्रकीर्ति जी के शिष्य थे। जो आमेर गादी के संस्थापक थे। जै

इंदौर Shreephal Jain News 14/3/2025, 6:00:06 am

भट्टारक शुभचंद्र (द्वितीय) का जैन समाज के नैतिक, सामाजिक, राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान: इनकी कृतियां साहित्य रसिकता पर पर्याप्त रोशनी डालने वाली हैं

राजस्थान के जैन संत व्यक्तित्व एवं कृतिव के क्रम में भट्टारक शुभचंद्र (द्वितीय) के बारे में अद्भुत जानकारी संकलित हैं। इनका समय 1723 से 1749 तक माना गया है। ये भट्टारक भुवन कीर्ति की परंपरा में होने वाले भट्टारक हर्षचंद्र के शिष्य थे, लेकिन आलोच्य भट्टारक शुभचंद्र जी भट्टारक अभयच

इंदौर Shreephal Jain News 13/3/2025, 6:00:22 am

आचार्य श्री चंद्रकीर्ति की रचनाओं में गुरु वंदना का प्रभाव: भट्टारक रत्नकीर्ति जी से दीक्षित थे आचार्य श्री चंद्रकीर्ति जी

राजस्थान की धरती पर जैन संतों ने तत्समय जो हिन्दी साहित्य के माध्यम से धर्म प्रभावना, प्रभु भक्ति के साथ गुरु भक्ति का संदेश दिया है। उनमें से एक संत आचार्यश्री चंद्रकीर्ति जी ने अपने अधिकांश पद्यों में गुरु वंदना को अधिक प्राथमिकता दी है। उन्होंने गुरु के साथ तो राजस्थान और गुजर

इंदौर Shreephal Jain News 12/3/2025, 6:00:19 am

ब्रह्म श्री जयसागर जी ने गुरु वंदना को साहित्य का आधार बनाया: राजस्थान के जैन संतों में है अनुपम स्थान

राजस्थान के जैन संतों की श्रंखला में अनेकोनेक संत हुए, लेकिन अपने गुरु के प्रति निष्ठावान शिष्य बिरले ही नजर आए। जिन्होंने जन साधारण के लिए साहित्य तो रचा,लेकिन अपने गुरु की वंदना के पदों को अधिक महत्ता प्रदान की। ऐसे ही जैन संत जिन्होंने राजस्थान में साहित्य के क्षेत्र में कीर्त

इंदौर Shreephal Jain News 11/3/2025, 6:00:10 am

भट्टारक श्री अभयचंद्र आध्यात्मिक जादूगर बन गए: काव्य वैभव और सौष्ठव प्रयुक्त होने की अपेक्षा प्रचार का लक्ष्य अधिक था

राजस्थान के जैन संतों ने जहां अपनी साधुता से जन-जन में आध्यात्मिक चेतना से जनजागरण किया। वहीं उनकी साहित्य साधना ने हिन्दी साहित्य को उस समय खूब समृद्ध किया। संतों का साहित्य के प्रति समर्पण के कारण जैन धर्म को आगे बढ़ाने में सफलता मिली। जैन धर्म के राजस्थान के दिगंबर जैन संतों पर

इंदौर Shreephal Jain News 10/3/2025, 6:00:30 am

बारडोली के संत श्री कुमुदचंद्र जी का साहित्य को अमूल्य योगदान: उनकी गुजरात और राजस्थान में अच्छी प्रतिष्ठा थी

राजस्थान को जैन संतों की भूमि के रूप में ख्याति अर्जित है। प्राचीन काल में भी यहां कई दिव्य संतों का जन्म और भ्रमण हुआ है। संत श्री कुमुदचंद्र जी ऐसे ही संत थे। वे संवत 1656 तक भट्टारक रहे। इतने लंबे समय में इन्होंने देश के अनेक स्थानों पर विहार किया। जन साधारण को धर्म आध्यात्म क

इंदौर Shreephal Jain News 9/3/2025, 6:00:32 am

आध्यात्म और भक्तिपरक पदों के रचियता भट्टारक श्री रत्नकीर्ति जी: रचनाएं भाषा, भाव और शैली सभी दृष्टियों से श्रेष्ठ

राजस्थान के जैन संतों ने जहां अपनी साधना से जनमानस को धर्म और आध्यात्म की ओर प्रेरित किया। वहीं मुनियों, साधुओं ने हिन्दी साहित्य में काव्य और भक्ति पदों के जरिये भी धर्म प्रभावना की अलख जगाई। जैन धर्म के राजस्थान के दिगंबर जैन संतों पर एक विशेष शृंखला में 11वीं कड़ी में श्रीफल ज

इंदौर Shreephal Jain News 8/3/2025, 6:00:05 am

बाहरी सुख-सुविधाओं या प्राकृतिक तत्वों से मिलने वाली शीतलता क्षणिक होती है : संतों और भक्तिपूर्ण जीवन से मिलने वाली शांति स्थायी और गहरी होती है

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाह

इंदौर Shreephal Jain News 7/3/2025, 7:00:57 am

संतश्री सुमतिकीर्ति जी ने केवल साहित्य साधना से ही जैन समाज को किया जाग्रतः हिन्दी, संस्कृत, प्राकृत और राजस्थानी के थे प्रकांड विद्वान

जैन धर्म में राजस्थान में संतों और साधुओं ने जहां अपनी तप और साधना के बल पर जन जागृति का अलख जगाया तो कुछ संत ऐसे भी हैं जिन्होंने केवल अपने साहित्य साधना से ही धर्म, संयम और उपासना के साथ आराधना के महत्व को प्रतिपादित किया। ऐसे संतों में एक नाम संत श्री सुमति कीर्ति का नाम आता ह

इंदौर Shreephal Jain News 7/3/2025, 6:00:21 am

दया अहंकार का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रेम का स्वाभाविक रूप है : सच्चा धर्म वही है, जिसमें किसी के प्रति भी निर्दयता न हो

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाह

इंदौर Shreephal Jain News 6/3/2025, 7:00:34 am

साधु जीवन को पूरी तरह निभाते और गृहस्थों को संयमित जीवन का उपदेश देते - भट्टारक श्रीवीरचंदः राजस्थान, गुजरात सहित कई प्रांतों में फैली थी कीर्ति

जैन दर्शन, धर्म और संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने और इस संप्रदाय की नींव को मजबूत बनाने के लिए राजस्थान की धरती पर जैन संतों ने जन्म लेकर राजस्थान ही नहीं गुजरात, बिहार, पंजाब और मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र आदि प्रांतों में धर्म ध्वजा को फहराया। ऐसे संतों में से एक संत हैं श्रीवीरचंद ज

इंदौर Shreephal Jain News 6/3/2025, 6:00:39 am

दया रहित व्यक्ति कठोर, स्वार्थी और क्रूर बन जाता है: सच्चा ज्ञान वही है, जो मनुष्य को दयालु और संवेदनशील बनाए

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाह

इंदौर Shreephal Jain News 5/3/2025, 7:00:20 am

जैन श्रावकों को सत्य, अहिंसा के साथ सधार्मिक होने का अवसर किया प्रदान - भट्टारक श्री शुभचंद : अपनी प्रतिष्ठा एवं पद का खूब अच्छी तरह से किया सदुपयोग

राजस्थान में जन्मे संत, साधु और मुनियों में से अधिकांश साहित्य प्रेमी, धर्म प्रचारक और शास्त्रों के प्रखर ज्ञाता रहे हैं। इसी के चलते यहां की पुण्य धरती ने संतों की वाणी से जैन धर्म को भी प्रखरता प्रदान की है। सेवा, विद्वता और सांस्कृतिक जागरूकता से ओतप्रोत संतवाणी ने जगत का कल्य

इंदौर Shreephal Jain News 5/3/2025, 6:00:12 am

हमारी भक्ति निष्काम और निस्वार्थ होनी चाहिए : भक्ति और माया एक साथ नहीं रह सकते

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाह

इंदौर Shreephal Jain News 4/3/2025, 7:00:59 am

महाव्रती संतश्री यशोधरजी ने पांच व्रतों को जीवन में उतार दिया : भगवान नेमिनाथ का गीतों में किया गान, राजस्थान की धरती को बनाया महान

जगत के कल्याण के लिए, जैन धर्म की प्रभावना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राजस्थान के जैन संतों ने अपने प्रवचनों से तो जन जागरण किया ही अपनी प्रखर लेखनी से भी लोगों को अमूल्य निधि भेंट की है। कई संतों ने विविध रसों और छंदों में अपनी बात कही है। कहीं चौपाइयों के माध्यम से तो कहीं गीत

इंदौर Shreephal Jain News 4/3/2025, 6:00:01 am

परमात्मा को बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि अंतरात्मा की गहराइयों में खोजें : ईश्वर-भक्ति और आत्मज्ञान ही सच्चे अर्थों में मुक्ति का मार्ग है

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाह

इंदौर Shreephal Jain News 3/3/2025, 7:00:04 am

शील, सदाचार, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र, वैराग्य और तप की बताई महत्ता - आचार्य श्री ब्रहम बूचराज जी नेः साहित्य और काव्य के माध्यम से तप, साधना और संयम का दिया संदेश

राजस्थान की धरती पर संतों ने जन्म लेकर केवल इसी धरती पर नहीं वरन कई-कई प्रांतों में विहार कर आध्यात्मिक चेतना, जीव और भगवान के बीच के संबंध को जानने का धर्म मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अनादिकाल से यह जीव जड़ को अपना हितैषी समझता आ रहा है। इस कारण ही जगत के चक्कर

इंदौर Shreephal Jain News 3/3/2025, 6:00:27 am