ब्रह्म धर्मसागर कवि के साथ संगीतज्ञ भी थे: नेमि और राजुल के गीतों की खूब है ख्याति
राजस्थान के जैन संतों की परंपरा में ब्रह्म धर्मसागर जी का स्थान भी काफी महत्वपूर्ण है। इन्होंने अधिकांश गीत अपने गुरु की प्रशंसा में ही लिखे हैं। इनके गीतों में सौंदर्य का भी पुट है तो विरह की वेदना भी नजर आती है। जैन धर्म के राजस्थान के दिगंबर जैन संतों पर एक विशेष शृंखला में 42
इंदौर • Shreephal Jain News • 12/4/2025, 6:00:00 am




















